Wednesday 25 November 2009

......काश!!!!थोडा और रुक जाते...


हाँ !

जैसा आपने चाहा था वैसे ही हमारी बेटी की शादी हुई। बड़ी प्यारी लग रही है।

बड़ी खुश भी है। सारे रिश्तेदारों ने हमारी इस खुशी में वक्त देकर हमारी ख़ुशीयों को जाने और बढ़ा दिया।

यहां दुर्रेशाहवार की सहेलियाँ भी शादी में शरीक होने दिल्ली से आई हुई हैं। दादा-दादी, फ़ुफ़ीयां, फ़ुफ़ा, बड़े अब्बा, बड़ी अम्मा, छोटे अब्बा, बड़ी ख़ाला, छोटी ख़ाला-ख़ालु, चचाजान,चचीजान,सारे भाई बहन, साथ में हम दोनों सब कोई बहोत खुश हैं।

क्योंकि आज प्यारी बेटीदुर्रेशाहवार की शादी है। हर तरफ रंगों की बौछार है। हंसी-मज़ाकों की फ़ौहार है। रोशनी से सारा आलम जगमगा रहा है।

देखो ना ! मेरे सब से छोटे भाई ने भी क्या खूबी से अपना फ़र्ज़ निभाया है अपनी भानजी के आमीन के ज़ोडे,गहने और बर्तन/कपड़ों के साथ दुआएं देकर।

हाँ ! आमीन के सेहरा भी मामू-मुमानी का ही है। देख़ो ना छोटा मुन्ना भी कितना खुश है?

और हाँ आपने दुर्रेशाहवार को जो सच्चे मोती के लालदुर्र देने को कहा था वों भी मामू-मुमानी ने दिये हैं।

दुर्रेशाहवार जैसी प्यारी-नेक बहु पाने की खुशी में उसके सास-ससुर तो फ़ुले नहिं समा रहे।

दामाद अनिस अली को तो शहेज़ादी मिल गई है वो तो खुश होंगे ही?

आप कहते थे न कि जो नसीब दार होगा उन्हीं के घर ये बेटी जायेगी। सच हुआ है आज आपका सुख़न।

आज तो लगता है सारी ख़ुशीयां गोदी में समा गई हैं।

......पर एक बात कहुं अम्मी !!!! आज एक ऐसी तनहाई भी है जो मेरी बेटी की ईस शादी की धूमधाम में भी बिल्कुल तन्हा है!!!

पता है वो कौन?

वो हैं मेरे बाबा

उनकी और छूप छूप के जब में देखती हुं तो वो इस भरे माहौल में आपको ही ढूँढ़ते है।

सोच रहे हैं कि शायद आप आज यहाँ होते!!

और आज मैं किसे रो रही हुं?

एक बेटी की बिदाई को?

बाबा की तनहाई को?

तेरी जुदाई को?

या इन सब को? अम्मी

जवाब तो शायद मेरे पास भी नहिं है अम्मी!!!!

.......................थोडा और रुक जाते अम्मी....

तो फिर मुझे सिर्फ़ बेटी की ज़ुदाई पे रोना होता

3 comments:

Nirmla Kapila said...

ेआँखें नम कर गयी आपकी ये पोस्ट बहुत बहुत बधाई बेटी की शादी की । बस यही दर्द होता है बेटी के होने का बाकी तो सब सुख ही हैं बेटियों के

M VERMA said...

बेटी की शादी की बधाई
नम कर दिया आपने तो

Rajey Sha said...

बधाई।