Thursday 3 September 2009

.....वक़्त ने साथ छोडा हमारा तो....





वक़्त ने साथ छोड़ा हमारा जो था,

हाय तेरा, तड़पना मुझे याद है।

मुंह छिपाकर तेरा मेरी आगोश में,

हाय कैसा बिलख़ना मुझे याद है।…हॉ मुझे याद है।

प्यार की वादीओ में गुज़ारे जो पल,

कैसे दिल से ओ साथी भूला पायेंगे?

जिन लकीरों पे कस्मे जो खाइ थीं कल,

आज हम वो लकीरें मिटा पायेंगे?

उन रक़ीबों के ज़ुल्मों को मेरे सनम,

हाय तेरा वो सहेना मुझे याद है। हॉ मुझे याद है।

ख्वाब हमने सज़ाये थे मिलकर सनम।

एक घरौंदा सुनहरा बनायेंगे हम।

साथ तेरा रहे, साथ मेरा रहे।

हमने ख़ाईं थीं इक-दूसरे की कसम|

उन वफ़ाओं की राहों में मेरे सनम,

आज भी सर ज़ुकाना मुझे याद है। हॉ मुझे याद है.

क्या करें मेरे महबूब अय जानेमन!

हम भी वक़तों के हाथों से मजबूर हैं।

ना नसीबा ही अपना हमें साथ दे।

ईसलीये ही तो हम आज यूं दूर है।

हिज्र के वक़्त में ओ मेरे हमसुख़न।

आज तेरा सिसकना मुझे याद है। हॉ मुझे याद है.

हाय चलती हवाओं उसे थाम लो।

ठंडी-ठंडी फ़िज़ाओ मेरा नाम लो।

सर से उस के जो पल्लू बिख़र जायेगा,

आहें भर के ये माशुक़ मर जायेगा।

याद जब जब करेंगे हमें राज़ तब।

हाय मेरा तड़पना मुझे याद है।

9 comments:

महफूज़ अली said...

वक़्त ने साथ छोड़ा हमारा जो था,
हाय तेरा, तड़पना मुझे याद है।
मुंह छिपाकर तेरा मेरी आगोश में,
हाय कैसा बिलख़ना मुझे याद है।…हॉ मुझे याद है।
प्यार की वादीओ में गुज़ारे जो पल,
कैसे दिल से ओ साथी भूला पायेंगे?
जिन लकीरों पे कस्मे जो खाइ थीं कल,
आज हम वो लकीरें मिटा पायेंगे?
उन रक़ीबों के ज़ुल्मों को मेरे सनम,
हाय तेरा वो सहेना मुझे याद है। हॉ मुझे याद है।
ख्वाब हमने सज़ाये थे मिलकर सनम।
एक घरौंदा सुनहरा बनायेंगे हम।
साथ तेरा रहे, साथ मेरा रहे।
हमने ख़ाईं थीं इक-दूसरे की कसम|


Bahut hi khoobsoorat lines hain yeh........ ye poori lines ki feelings se main guzar chuka hoon........ isliye isey khud ke kareeb pa raha hoon........ aapne ek dil ko chhoo lene wali kavita likhi hai.......... jisko hum khud se jod sakte hain.......

waaqai mein waqt ke haathon hum majboor hoten hain.......... kismat ke dwara chhaley jaate hain.... aur phir yahi dono mil ke door kar dete hain......

bahut hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii khoobsoorat.........

दिगम्बर नासवा said...

UN KA BILAKHNA, MUSKURAANA, SAR JHUKAANA SAB KUCH HI TO YAAD HAI ..... SACH KAHA JAB VAQT CHOD DETA HAI TO SAB KUCH YAAD AA JAATA HAIU .... SUNDar rachna hai....

अनिल कान्त : said...

एहसास और भावनाओं को बहुत खूबी से आपने लिखा है

अर्शिया said...

सुंदर एवं सार्थक रचना।
( Treasurer-S. T. )

M VERMA said...

सर से उस के जो पल्लू बिख़र जायेगा,
आहें भर के ये माशुक़ मर जायेगा।
एहसास की यह रचना बहुत खूब है.
यादो का कारवा जब चलता है तो ----

ओम आर्य said...

हर टुटे दिल की आवाज है आपकी यह रचना .........दिल के करीब लगी आपकी यह रचना

AlbelaKhatri.com said...

बहुत ख़ूब रज़िया जी..........
उम्दा कहा........
खासकर इन लफ्ज़ों ने तो घायल कर डाला........

हाय चलती हवाओं उसे थाम लो।

ठंडी-ठंडी फ़िज़ाओ मेरा नाम लो।

सर से उस के जो पल्लू बिख़र जायेगा,

आहें भर के ये माशुक़ मर जायेगा।

बधाई !

शरद कोकास said...

अच्छी है यह भावनाओं की अभिव्यक्ति

Udan Tashtari said...

बहुत खूब कहा!