
.....अभी तक तो अपनी पोस्ट लिखती रही।
..... पर आज एक ऐसी पोस्ट लिखने जा रही हुं जो अनदेखा होते हुए भी हमारा,
और....हम सब का है।
वो है "ब्लोगवाणी'।
कल ही सुब्हा, जब असत्य पर सत्य के त्यौहार"विजयादशमी" की बधाई देने जैसे ही ब्लोगर का पन्ना खोला...
.....एक दर्दभरा समाचार सुननेको मिला।
"दशहरे के मौके पर ब्लोगवाणी बंद'
ये पढना हमारे लिये काफ़ी कठीन रहा।
मानो जैसे एक मिठाई में नमकीन का आ जाना।
वैसे ही हमें दशहराके त्यौहार के बीच ये लगने लगा था।
कुछ मज़ा नहिं आ रहा था कल ।
लग रहा था कि कोई अपना हमें छोडकर चला गया।
पर आज...जब ये पढा कि 'ब्लोगवाणी वापस आ गया है" , मन प्रफ़ुल्लित हो उठा।
ऐसा लगा जैसे " कोई अपनों से रुठा ,....अपना, फ़िर से वापस आ गया"
बडे आनंद का अनुभव कर रही हुं आज।
आज की मेरी ये पोस्ट " खासकर ब्लोगवाणी को समर्पित है"।
4 comments:
बहुत ही अच्छी पोस्ट, आप सब के स्नेह ने ब्लागवाणी को जाने से रोक लिया और ब्लागजगत को खुशगवार बना दिया, आभार के साथ शुभकामनाएं ।
बिल्कुल सही लिखा है आपने ....मेरी भी कुछ ऐसी ही हालत थी और क्या कहे ......बहुत ही बढिया अभिव्यक्ति !ब्लोगवानी का आगमन एक खुशी की लहर पैदा कर रही है!
वापसी
जाने के बाद हुई
अब
जाना न होने पाये
रज़िया जी, कहॉ हैं आप? आप की कोई नई पोस्ट नहीं आ रही है. जागरण जंक्शन पर इंतजार किया आपकी पोस्ट का लेकिन देख रहा हूं कि आप हैं नादारद.
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