Wednesday 21 April 2010

आप बहोत याद आती हो "अम्मी"































हाँ ! एक साल पहले ही कि तो बात है। आज मैं आप ही के साथ थी। आज शाम को आपने हमें शादी में जाने की इजाज़त दी तो थी पर थकी थकी आवाज़ में आपने कहा था कि कल तो शादी थी फ़िर आज क्या है? हमने कहा रिसेप्शन है। रात को जल्द आ जायेंगे।
मैं और बडी आपा कुछ ज़बरदस्ती ही जा रहेथे। कुदरत को भी शायद ये नागंवार गुज़र रहा था कि रास्ते में ही गाडी को पंकचर हो गया। फ़िर भी दुसरी गाडी लेकर हम रिसेप्शन तक पहोंच गये। रातको वापस आये तो आप हमारे इंतेज़ार में ही बैठी थी। छोटीबहन और भाभी भी आपके पास थीं। आज भी मेरी नज़र के सामने वो मंज़र आ जाता है कि आप हमें देख रही थीं पर आपकी आंख़ों में मानो बिनाई नहिं थी। आप को हमने अपने पलंग पर सुला दिया। मैं रात को आपके पास ही सो रही थी। आप की आंखें बार बार घडी की तरफ़ देखती रहती थीं। क्या वक़्त हुआ है?
मुझे ज़ी चाहता था कि मैं आप से लिपट जाउं, ताक़ि कोई आपको हम से छीनकर न ले जाये मौत भी नहिं। पर मुझे डर था कि आप समझ जाओगी कि मेरा वक़्त करीब है ईसीलिये मैं ये कर रही हुं।हम आपको ये जताना चाहते थे कि आप ठीक हैं। रात कैसे कटी ये तो हम ही जानते हैं।
सुब्ह मैं अपने घर जाने निकल रही थी पर आप बेख़बर सो रहींथीं। ऐसा कैसे हो सकता है कि मैं जब भी अपने घर जाती थी तो आप घर से बाहर तक मुझे ख़ुदा हाफ़िज़ कहने आया करती थीं जब तक आपकी नज़र मुझे देखे आप हाथ हिलाती रहती थीं और आज?
फ़ेमिली डोकटर ने कहा कोई बात नहिं अभी दवाई का घेन है दोपहर तक होश आ जायेगा। मैं अपने घर पहोंची 45 किमी से ज्यादा दूर है। पर घर में दिल नहिं लग रहा था। एक बेचेनी-सी थी। आपने हमें अपनी कोख़ में नौ महिने जो पाला था और अपमा अमृत जो पिलाया था कैसे चैन मिलता।
बस दो घंटे ही बिते थे कि ख़बर आई कि "अम्मी हमें छोडकर चले गये"
आज एक साल हो गया है आपको खोकर। कैसे गुज़रा ये साल?
आप बहोत याद आती हो "अम्मी"



6 comments:

चिट्ठाचर्चा said...

आईये... दो कदम हमारे साथ भी चलिए. आपको भी अच्छा लगेगा. तो चलिए न....

विनोद कुमार पांडेय said...

माँ को कभी भुलाया नही जा सकता है...वो हमेशा याद आती हैं...माँ को नमन है...

Shah Nawaz said...

Khuda ke baad maan ka darja duniya mein sabse adhik hota hai. Duniya mein koi bhi man se zyadah kareeb nahi ho sakta. Vah man hi hoti hai jo swayam to geele bistar mein soti hai aur bachcho ko sukhe bistar mein sulati hai.

Udan Tashtari said...

क्या कहें..यूँ तो माँ कहीं जाती नहीं..होती तो हमारे साथ ही हमेशा मगर जब तक हम उसे देखे न..भला मन कब भरता है..याद तो हमेशा बनी रहती है.

मैं दर्द समझ सकता हूँ. माँ को श्रृद्धांजलि. जहाँ भी होगी, आपको आशीष दे रही होगी.

Shekhar Kumawat said...

बहुत सुंदर


bahut khub


shekhar kumawat


http://kavyawani.blogspot.com/

RAJNISH PARIHAR said...

माँ तो माँ होती है,उसके बिना जीना अकल्पनीय है!हमें हर समय माँ ही तो साथ देती है...बचपन में कभी बिस्तर गीला नही होने दिया और अब संतान की आँखों को गीला नही देख सकती!!!ऐसी माँ को मैं सौ बार प्रणाम करता हूँ.... माँ हमेशा आपके साथ ही है ....माँ को श्रृद्धांजलि