Monday 28 September 2009
.....अभी न जाओ छोडकर.....

.....अभी तक तो अपनी पोस्ट लिखती रही।
..... पर आज एक ऐसी पोस्ट लिखने जा रही हुं जो अनदेखा होते हुए भी हमारा,
और....हम सब का है।
वो है "ब्लोगवाणी'।
कल ही सुब्हा, जब असत्य पर सत्य के त्यौहार"विजयादशमी" की बधाई देने जैसे ही ब्लोगर का पन्ना खोला...
.....एक दर्दभरा समाचार सुननेको मिला।
"दशहरे के मौके पर ब्लोगवाणी बंद'
ये पढना हमारे लिये काफ़ी कठीन रहा।
मानो जैसे एक मिठाई में नमकीन का आ जाना।
वैसे ही हमें दशहराके त्यौहार के बीच ये लगने लगा था।
कुछ मज़ा नहिं आ रहा था कल ।
लग रहा था कि कोई अपना हमें छोडकर चला गया।
पर आज...जब ये पढा कि 'ब्लोगवाणी वापस आ गया है" , मन प्रफ़ुल्लित हो उठा।
ऐसा लगा जैसे " कोई अपनों से रुठा ,....अपना, फ़िर से वापस आ गया"
बडे आनंद का अनुभव कर रही हुं आज।
आज की मेरी ये पोस्ट " खासकर ब्लोगवाणी को समर्पित है"।
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