Sunday 27 January 2013

..फ़िर छिड़ी रात बात फूलों की.....






फिर छिड़ी रात बात फूलों की
रात हैं या बरात फूलों की

फुल के हार, फुल के गजरे
शाम फूलों की, रात फूलों की

आप का साथ, साथ फूलों का
आप की बात, बात फूलों की

फुल खिलते रहेंगे दुनियाँ में
रोज निकलेगी, बात फूलों की

नज़ारे मिलती है, जाम मिलते है
मिल रही है, हयात फूलों की

ये महकती हुयी गज़ल मखदूम
जैसे सेहरा में, रात फूलों की

3 comments:

रेयाज़ बघाकोली said...

Jamin pe bhi phalak pe bhi
Dono jahan me hai baat phulon ki

Jis jis dagar se gujar jaye
Har jagah pe hai baat pholon ki

Arun Mishra said...

बहुत सुंदर

Aniruddha said...


ये महकती हुयी गज़ल मखदूम
जैसे सेहरा में, रात फूलों की