Sunday, January 27, 2013

..फ़िर छिड़ी रात बात फूलों की.....






फिर छिड़ी रात बात फूलों की
रात हैं या बरात फूलों की

फुल के हार, फुल के गजरे
शाम फूलों की, रात फूलों की

आप का साथ, साथ फूलों का
आप की बात, बात फूलों की

फुल खिलते रहेंगे दुनियाँ में
रोज निकलेगी, बात फूलों की

नज़ारे मिलती है, जाम मिलते है
मिल रही है, हयात फूलों की

ये महकती हुयी गज़ल मखदूम
जैसे सेहरा में, रात फूलों की

5 comments:

रेयाज़ बघाकोली said...

Jamin pe bhi phalak pe bhi
Dono jahan me hai baat phulon ki

Jis jis dagar se gujar jaye
Har jagah pe hai baat pholon ki

Unknown said...

बहुत सुंदर

Aniruddha said...


ये महकती हुयी गज़ल मखदूम
जैसे सेहरा में, रात फूलों की

First Uttar Pradesh said...

अपने आस-पास की ताजा खबर पढ़े! Firstuttarpradesh.com पर, Click Here

Ankit said...

bhut hi badiya post likhi hai aapne. Ankit Badigar Ki Traf se Dhanyvad.