Monday 28 July 2008

कर्मयोगी




चलो जलायें दीप वहॉ,जहॉ अभी-भी अँधेरा है।
कदम बढाऎ उस पथ पर,जहॉ परिवर्तन का बसेरा है।
चलो जलायें..
मिलजुल कर हम काम करें तो एकता शकित पायेंगे।
कल का काम करें हम आज, ये नीति अपनाऎगे।(2)
आत्मचिंतन का पाठ पढें, क्या तेरा क्या मेरा है?
चलो जलायें...
अपना दायित्व पहचानें, आचार शुद्धि लायें जो।
अपने लक्ष्य को नाप लें गर हम,लक्ष्यशक्ति को पाये जो(2)
छोड़ खड़े हो कामचोरी को...(2) जिसने सब को घेरा है।
चलो जलायें...
कर्म सेवक है हम कर्मो के कर्मयोगी है अपना नाम।
ये मम भाव जीवन में उतारें,निष्ठा से देंगे अंजाम। (2)
विकास पथ की और चले...(2) जहां हो नया सवेरा है।
चलो जलायें...
कार्यकुशलता होगी हममें, हम सब कुछ पा लेंगे।
रक्षा अपनी करके ही हम, रक्षा शक्ति पा लेंगे। (2)
चिंतन शिबिरों से हमने...(2)
ये अभियान जो छेड़ा है...।
चलो जलायें...
कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
करता जा तू कर्म ओ “मानव”।
फल की चिंता मत करतू...।(2)
गीता का कर्मबोध ये शिखे...।(2)
फिर भारत ये सुनहरा है...।.
चलो जलायें...

4 comments:

मोहन वशिष्‍ठ said...

वाह जी रजिया जी बहुत ही सुंदर गीत है ये इसे आप रिकार्डिंग कराओ हिट होना है बहुत ही अच्‍छा है धन्‍यवाद के साथ बधाई हो आपको

नीरज शर्मा said...

अच्‍छा लिखती हो । जारी रखो।

ज़ाकिर हुसैन said...

शानदार गीत
चलो जलायें दीप वहॉ,जहॉ अभी-भी अँधेरा है।
कदम बढाऎ उस पथ पर,जहॉ परिवर्तन का बसेरा है।
चलो जलायें..
मिलजुल कर हम काम करें तो एकता शकित पायेंगे।
कल का काम करें हम आज, ये नीति अपनाऎगे।(2)
आत्मचिंतन का पाठ पढें, क्या तेरा क्या मेरा है?
इसी तरह अलख जगाये रखिये इंशाल्लाह एक दिन हमारे सपनों के भारत का निर्माण होगा

विनय प्रजापति 'नज़र' said...

बहुत बढ़िया रचना, बधाई स्वीकारें!