Saturday 8 August 2009

दाता तेरे हज़ारों है नाम…



दाता तेरे हज़ारों है नाम…(2)

कोइ पुकारे तुज़े कहेकर रहीम,

और कोइ कहे तुज़े राम।दाता(2)

क़ुदरत पर है तेरा बसेरा,

सारे जग पर तेरा पहेरा,

तेरा राज़बड़ा ही गहेरा,

तेरे इशारे होता सवेरा,

तेरे इशारे होती शाम।दाता(2)

ऑंधी में तुं दीप जलाये,

पथ्थर से पानी तुं बहाये,

बिन देखे को राह दिख़ाये,

विष को भी अमृत तु बनाये,

तेरी कृपा हो घनश्याम।दाता(2)

क़ुदरत के हर-सु में बसा तू,

पत्तों में पौंधों में बसा तू,

नदीया और सागर में बसा तू,,

दीन-दु:ख़ी के घर में बसा तू,

फ़िर क्यों में ढुंढुं चारों धाम।दाता(2)

ये धरती ये अंबर प्यारे,

चंदा-सुरज और ये तारे,

पतज़ड हो या चाहे बहारें,

दुनिया के सारे ये नज़ारे,

देख़ुं मैं ले के तेरा नाम।दाता(2)



7 comments:

मिथिलेश श्रीवास्तव said...

रजिया जी, आपके ब्लॉग की डिजाइन की तरह आपकी कविताएं भी भावनाओं से ओत-प्रोत हैं, मुझे एक फिल्म का वो गाना याद आने लगा..तेरा ही करम 2...मेरे साथ ही चला मेरे साथ ही रुका....तेरा ही करम.........!!

M VERMA said...

रजिया जी
भावनाओ से ओत प्रोत एक और खूबसूरत रचना के लिये बहुत बहुत बधाई

Udan Tashtari said...

बढ़िया भावपूर्ण.

महफूज़ अली said...

--------------------
bahut hi khoobsoorat rachna padhane ke liye shukriya........
aise hi likhte rahen.........
तेरा ‘राज़’बड़ा ही गहेरा, yeh line waaqai mein gahri hai...

Regards.........
---------------------

www,lekhnee.blogspot.com

महफूज़ अली said...

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bahut hi khoobsoorat rachna padhane ke liye shukriya........
aise hi likhte rahen.........
तेरा ‘राज़’बड़ा ही गहेरा, yeh line waaqai mein gahri hai...

Regards.........
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www.lekhnee.blogspot.com

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र said...

खूबसूरत रचना बहुत बहुत बधाई.

યુવા રોજગાર said...

Very-very nice blog.

I think can u write in gujarati and yours gujarati blog at Gujaratiblogs.com ! So why closed write gujarati blog ?!

आपकी सभी रचनाए बढियां एवम बहुत ही भाववाही और रसप्रद है!
अभिनंदन !!