Tuesday 26 January 2010

२६ जनवरी के गौरवमई पर्व पर भाईचारे का सन्देश

ना तेरा खुदा कोई और है I
ना मेरा खुदा कोई और है II
*
ये जो रास्ते हैं जुदा-जुदा I
ये मामला कोई और है II
*
जिसे ढूंढता है तू यहाँ-वहाँ I
दिल में तेरे वो मौजूद है II
*
जिसे मिल गया एक बार वो I
उसका सारा संसार है II
*
ना तेरा खुदा कोई और है I
ना मेरा खुदा कोई और है II
***
http://www.thenetpress.com/

5 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

apki shayri khuda se jodti hai fasle ghatati hai . hum bhi issi raste ke musafir hain.
dekhen
http://vandeishwaram.blogspot.com
apko vote karta hun.

निर्मला कपिला said...

रज़िया जी बिलकुल सही कहा न् तेरा खुदा कोई और है न मेरा खुदा कोई और है--- बहुत सुन्दर बात आदमी को आदमी से जोडनी वाली शुभकामनायें

निर्मला कपिला said...

रज़िया जी बिलकुल सही कहा न् तेरा खुदा कोई और है न मेरा खुदा कोई और है--- बहुत सुन्दर बात आदमी को आदमी से जोडनी वाली शुभकामनायें

दिगम्बर नासवा said...

ना तेरा खुदा कोई और है
ना मेरा खुदा कोई और है
जिसे ढूंढता है तू यहाँ-वहाँ
दिल में तेरे वो मौजूद है ....

सच कहा ......... सबकी मंज़िल, सबका खुदा एक ही है बस रास्ते अलग अलग हैं ........

KAVITA RAWAT said...

Bahut sundar sandesh prastut kiya aapne.
Shubhkamnayen